Friday, June 15, 2012

दो धंधे बड़े ही चंगे..........................part IIl


कार्ल मार्क्स ने कहा था कि धर्म अफीम कि तरह होता है जिसका नशा एक बार चढ़ जाये तो फिर जिंदगी भर नहीं उतरता. भारत में ये बात पूरी तरह से १०० फीसदी सही उतरती है.अब हो जाये इस धंधे के धंधे कि बात. इसकी सबसे खास बात ये है कि केवल आपकी और केवल आपकी ही प्रतिभा आपके साथ चलती है.और प्रतिभा भी कुछ ख़ास तरह की होती है. यदि आप इस धंधे  में उतरना चाहते हैं तो कुछ ख़ास बातें जान लें और परख लें की वे आप में हैं अथवा नहीं.  
आइये कुछ बातों को जान लें:-
@ यदि आप में शब्द जाल में लोगों को उलझने याने फ़साने का हुनर  है तो आप इस धंधे में फिट बैठेंगे. ये तभी हो सकता  है जब    आप  बातें  करने  में  माहिर  हो  याने  वाक्पटुता  होनी  चाहिए .आप लोगों को जितना अधिक बेवकूफ बना सकेंगे उतने ही अधिक  भक्त आपकी झोली में आन टपकेंगे , भारत में इस श्रेणी  के लोगों की कमी नहीं है एक ढूंढना  हजार मिलेंगे..
 
@ कुछ चमत्कारों की बात हो जाये, ये देश वैसे भी चमत्कारों का देश है,to चमत्कार मसलन हवा में भभूत पैदा करना,सिक्के निकलना,हवा में फूल  निकलना, अगर बड़ा चमत्कार कर सकते हैं तो अपने भक्तों के लिए सोने के गहने जरुर निकले आपके भक्त हजारों में नहीं लाखों में होंगे.अगर आप ऐसा कर सके तो यकीन मानिये आपकी धर्म की shop को shopping moll बनाने से कोई मै का लाल नहीं रोक पायेगा.

@संस्कृत के कुछ श्लोक तो learn by heart होने चाहिए.और उनके meaning पता  होना चाहिए.श्लोक भी ऐसे हूँ की भक्तों को लगे की गुरूजी उनके कल्याण के लिए बोल रहे हैं.
 
@ लोगों को पूर्व जन्म के पाप और इस जन्म के कर्मों के फलस्वरूप अगले जन्म का भय समय-समय पर जरुर दिखाते रहें. इससे होगा ये की कोई भी भक्त आपके पंजे से छूट नहीं सकेगा.

 @ याद रखिये आपके जासूस बेहद जरुरी हैं, जो समय समय पर आपको आपके भक्तों की सोच से अवगत करा सकें अन्यथा आजकल बक्त कब अपना गुरूजी या स्वामीजी बदल लें पता ही नहीं चलता.
 
@ आजकल इसे एजेंट रखने पड़ते हैं जो भक्तों के बिच आपके चमत्कारों के अफवाहें फैला सकें उन्हें आपकी महिमा के बारे में बता सके, जिससे लोग आपकी ओर खिचे चले आयें.

@ बेहतर है की आप एक PRO appoint कर लें आजकल तो बहुत सारी एड कंपनी इस तरह की सेवाएं बेहद कम रेट पर उपलब्ध करवा रही हैं.

 
अब काम की बात :- भारत में धर्म की फसल उगने के लिए किसी विशेष जमीं की जरुरत नहीं है. यहाँ रेगिस्तान या पथरीली जमीं पर भी आप इसकी फसल उगा सकते हैं, जरुरत है तो धर्म के अंधे लोगों की और भारत में तो इसकी कमी कभी भी नहीं हो सकती.बस आप अपना काम केवल एक चेले से भी शुरू कर सकते हैं , किसी भी धार्मिक स्थल पर पहुच जाएँ और अपनी पैनी निगाह से वहां के वातावरण का जायजा लें और शुरू हो जाएँ............आपका धर्म का धंधा कल निकलेगा.

3 comments:

  1. बिलकुल सही कहा... बेहतरीन कटाक्ष है.... यह दुकाने तभी तक है जब तक हम चढ़ाव चढाते रहेंगे... जिस दिन चढ़ाव इनको चढाने की जगह मजबूर लोगो को देना शुरू कर देंगे... उस दिन इनकी दुकाने बंद हो जाएंगी...

    इस विषय पर मेरे लेख..
    देश की चूलें हिला रहा है धार्मिक भ्रष्टाचार<
    धार्मिक ठेकेदारो की दादागीरी

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (17-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  3. धर्म कम से कम अफीम तो नहीं है... आप संभवतः पाखंड की बात कर रहे हैं...
    धर्म कभी भ्रमित नहीं करता और न ही किसी को ठगता या लूटता है...

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