Thursday, August 13, 2015

भारतीय चिंतन


 भारतीय चिंतन



भारतीय चिंतन वास्तव में इंसान की चेतना से जुड़ा है. किया लोग चेतना को मन से जोड़करदेखते है जबकि मन आवारा बदल की तरह केवल डोलना जानता और वह किसी भी तरह के बंधन का हामी नहीं होता,है जबकि चेतना स्वतः नियंत्रित होती है. जब हम मन को साधना सीख जाते हैं तो हमारी चेतना जागृत होती है और फिर विचारों का प्रवाह हमारे भीतर तरंगित होने लगता है और विचार हमारी चेतना से जुड़कर मनन की क्रिया में जाते हैं, फिर मनन के बाद यही विचार विश्लेषण करने के पश्चात् आध्यात्म का रूप लेते हैं.
वीणा सेठी

4 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (14.08.2015) को "आज भी हमें याद है वो"(चर्चा अंक-2067) पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  2. बहुत सुन्दर
    सुन्दर आलेख के लिए बधाई

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  3. Blogging is the new poetry. I find it wonderful and amazing in many ways.

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